मासिक साधना उपयोगी तिथियाँ

व्रत त्योहार और महत्वपूर्ण तिथियाँ

25 फरवरी - माघी पूर्णिमा
03 मार्च - रविवारी सप्तमी (शाम 06:19 से 04 मार्च सूर्योदय तक )
06 मार्च -
व्यतिपात योग (दोपहर 14:58 से 07 मार्च दिन 12:02 मिनट तक)
08 मार्च - विजया एकादशी (यह त्रि स्पृशा एकादशी है )
09 मार्च - शनि प्रदोष व्रत
10 मार्च - महा शिवरात्री (निशीथ काल मध्यरात्री 12:24 से 01:13 तक )
11 मार्च - सोमवती अमावस्या (
सूर्योदय से रात्री 1:23 तक )
11 मार्च - द्वापर युगादी तिथि
14 मार्च - षडशीति संक्रांति (पुण्यकाल शाम 4:58 से
सूर्योदय तक)
19 मार्च - होलाष्टक प्रारम्भ
20 मार्च - बुधवारी अष्टमी (
सूर्योदय से दोपहर 12:12 तक)
23 मार्च - आमलकी एकादशी
24 मार्च - प्रदोष व्रत
26 मार्च - होलिका दहन
27 मार्च - धुलेंडी , चैतन्य महाप्रभु जयंती
29 मार्च - संत तुकाराम द्वितीय
30 मार्च - छत्रपति शिवाजी जयन्ती

गुरुवार, 5 फ़रवरी 2009

पूनमव्रत महात्मय - सुरेशानन्द जी

पूनमव्रत दर्शन

भारतीय संस्कृति में ऐसी सुन्दर व्यवस्था है कि अधिकतर भगवत सम्बंधी कार्य पूनम के दिन ही किये जाते है। जैसे तीर्थ स्नान, उसकी महिमा है। गुरुदेव के दर्शन, पूनम के दिन विशेष उसकी महिमा हैं। पूर्णिमा तिथी का विशेष महात्म्य क्या है। यजुर्वेद में आता हैं

"चन्द्रमा मनसो जातस चक्षों सूर्यो अजायतः" ।

अर्थात हमारे मन की उत्पत्ति चन्द्रमा से हुई है और पूनम के दिन चन्द्र पूर्ण कला विकसित होता है। पूर्ण कला सम्पन्न होता है। उस दिन हमारा मन भी पूर्ण उल्लासित होता हैं जैसे पूनम के दिन समुद्र आदि के जल में भी विस्तार आ जाता हैं ज्वार आता है बढ्ती आती है विशेष, रोज की अपेक्षा तो पूनम के दिन हमारा मन भी चरम विस्तार पाता हैं तो उस फैले हुए विस्तारता युक्त मन में जगत की कोई कामना या वासना न भरे बल्कि गुरुदेव की भक्ति व्यापे इसलिये सनातन धर्म में ये व्यवस्था है कि पूनम के दिन ऐसे पवित्र कार्य करे और पूनम के दिन गुरु दर्शन का नियम रखें तो उस दिन हमारा मन और अधिकाधिक भक्ति संपन्न होता हैं। वासनायें दूर होती है। इसलिये जो श्रद्धा से पूनम व्रत करते है हर पूनम को गुरु दर्शन करके फिर अन्न-जल ग्रहण करते है तो उनको विशेष-विशेष भक्ति लाभ होता है ये मैनें कई पूनम व्रतधारी भाई-बहनों के जीवन में देखा है। उनकी एक अलग ही आभा हैं। पूनम व्रतधारी जो वास्तव में पूनम व्रतधारी हैं उनका एक अलग ही प्रभाव है। जो गुरुदेव से कुछ चाहते नही है केवल एक प्रेम है कि ज्ञानदाता, भक्तिदाता, दिक्षादाता हमारा कल्याण चाहने वाले और करने वाले गुरुदेव के महिने में एक बार हमको दर्शन का लाभ मिल जायें।

"दर्शनम तव लोकस्य सर्वथा अघहरं परम"।

ऐसे भक्तों की आभा कुछ अलग ही होती है। उनकी मानसिकता बहुत ही अच्छी और ऊँची होती हैं। उनकी आन्तरिक स्थिति बहुत बढिया होती हैं बाहर कैसी भी परिस्थिति आ जाये वो परिस्थितियाँ उनको विचलित नही कर सकती है। आनन्द में रहते है। बर्फ पानी का ही एक दूसरा रूप है जमा हुआ, बर्फ पर स्याही की एक बूँद डालों तो वो फैलेगी नही वो उतने में ही रहेगी पर बर्फ पानी बन गई, गल गई, उसमे स्याही की एक बूँद डालो फैल जायेगी। पूनम के दिन हम जब गुरुदर्शन करते है गुरु की कृपा की एक किरण वो हमारे दिल-दिमाग में भर जाती हैं इसीलिये पूनम के दिन गुरुदेव के दर्शन का महात्म्य है और जो इस महात्म्य से अनजान है। वो बिचारे अपने मन में कामनाये और वासनाये भरते हुए और बढाते हुए अपना अमूल्य निर्मूल्य गवाँ देते है। मुठ्ठी बाँधे आते है, हाथ पसारे चले जाते है। कुछ ले कर आये थे श्वासों का खजाना वो भी गँवा कर चले जाते है और साधक जो आस्थावान होते है वो श्वासों का खजाना ले कर धरती पर जन्मे थे श्वासों का खजाना तो कम होता जाता है पर भीतर भक्ति का खजाना वो बढाते जाते है और बडे सम्पदावान हो जाते है। पूनम के दिन गुरुदर्शन की महिमा है। पूनम के दिन चन्द्रमा को अर्घ्य देने की भी महिमा है, पूनम की रात को, दूध ना मिले तो पानी से ही चन्द्रमा को अर्घ्य दे और अर्घ्य देते समय बोलियेगा, जिनको कोई आर्थिक परेशानी हो उनको तो चन्द्र्मा को अर्घ्य हर पूनम के दिन जरूर देना चाहिये। दूध कही भी अर्घ्यदान देना हो तो ताँबे के लोटे से नही दिया जाता है फिर स्टील का लोटा चाहिये। पूनम की रात को चन्द्रमा को अर्घ्य देते समय पौराणिक श्लोक हैं वो पढना चाहिये।

दधि शंख तुषाराभम, क्षीरो दारनव शनीभम ।
नमामि शशिनम सोमम, सम्भोर मुकुट भूषणं ॥

शिवजी ने हे चन्द्र देव! आपको अपना मुकुट बनाया हैं अपने भाल (मस्तक) में धारण किया हैं। आपको मेरा प्रणाम हैं। आपको शिवजी के भाल में स्थान मिला, हे चन्द्रदेव! मन के मालिक देव! हमको हमारे गुरुदेव के हृदय में स्थान मिले। जो हमारे तारणहार है, उनके दिल में, चरणों में सदा के लिये स्थान मिल जायें। हम उनसे कभी दूर न हों हम सदैव उनके सम्मुख रहें। हमारी गुरुदेव के दिल में जगह बन जाय और वो बनी रहे। इस प्रकार चन्द्रमा के अर्घ्य दें दे।

स्रोतः- उत्तरायण ध्यानयोग शिविर २००९ (११ जनवरी २००९ सुबह के सत्र में)।
पूनम दर्शन व्रत दो तरह से किया जाता है :-

१ - जहाँ गुरुदेव हो वही जाकर दर्शन किये जाये।
२ - जो साधक भाई-बहन देश से दूर है या जो जहाँ गुरुजी है वहाँ नही जा सकते है तो वे साधक भाई-बहन निकट के आश्रम में जाकर गुरुदेव के दर्शन करे और पूनम व्रत का पालन करे।
लिखने में यदि कुछ गलती हो गई हो तो गुरुदेव के चरणों में क्षमा प्रार्थी हूँ ...

हरिः ॐ .........

सोमवार, 26 जनवरी 2009

वाणी के १० दोष - स्वामी सुरेशानन्द जी

वाणी के १० दोष


वाणी के १० दोष माने गये है शास्त्रों में, यदि ये १० दोष न हो तो हमारी वाणी के द्वारा हमेशा शुभ होगा, अच्छा होगा, बढिया होगा। उससे लोगों को भी आनन्द आयेगा और अपने को भी आनन्द आयेगा । वाणी के १० दोष घरों में कृपया आप बच के चले, घर पे खास, घर में शान्ति रहेगी, घर में झगडे नही होंगे न तो लक्ष्मी आयेगी, पैसा बढेगा। पति दुकान पे आफ़िस पे काम-धन्धा करता है मेहनत करता है बेचारा पर, घर पे आकर लडाई-झगडा भी करता है। तो फिर बोलते है कि घर पर बरकत नही होती, बचत नही होती, क्या करे ? तो जहाँ झगडे होते है क्लेश होते है वहाँ लक्ष्मी रहती नही हैं। तो वाणी के १० दोष सतसंग से दूर होते है। सतसंग में ये शक्ति हैं कि ये दोष दूर हों। सतसंग सब सुखों का मूल है। सतसंग से वांछित सिद्धि होती है और सतसंग में केवल बैठ कर सुनना ही नही, सतसंग माने फिर जो सुना फिर घर गये तो जो समय है हमारे पास उसका सदुपयोग करते रहना ऐसा नही कि सिरियल देखने बैठ गये, फिल्म देखने बैठ गये क्या हो जायेगा कोई बात नही फिल्म देख लो, कोई बडा भारी अपराध भी नही है पर जिसको आध्यात्मिक उन्नति करनी हो तो उसको इससे तो बचना ही पडेगा। समय अपना नष्ट ना हो।
हम कही से जा रहे हो पैदल या कार में या ट्रेन में तो कई बार आपका अनुभव होगा कि कोई गन्दा नाला पास से बह रहा है तो बदबू आती है, तो हम क्या करते है कि बदबू से बचने के लिये तुरन्त अपनी नाक पर रुमाल रख लेते है कि बदबू आई, तो जैसे हम दुर्गन्ध को हम अपने अन्दर आने देना पसन्द नही करते वैसे ही हम कोई कुविचार को, कोई कुसंग को, कोई संग के दोष को, गलत आदमी मिल गया और वो हमको गलत राह पर ले जाना चाहता है तो हम उसको अपने भीतर प्रवेश न करने दे उसके संस्कारों को उसकी आदतों को अपने भीतर न धुसने दे तो हमको लाभ बहुत होगा। शूगर की दवाई भी खाये और फिर मीठा भी खाये तो शूगर नियंत्रण में कैसे होगी। करेले का रस पीना पडेगा। कडुवा होगा पर हितकर हैं।
तो जहाँ शुद्ध हवा नही आती न कमरे में, आपका कमरा कितना बढियाँ क्यो न हो पर आपके कमरे में अगर शुद्ध हवा नही आती है सूर्यनारायण की सुबह की ताजी धूप नही आती है तो फिर वहाँ पर बिमारी फैलेगीं, रोग होंगे, शरीर तनदुरुस्त नही रहेगा । उसी प्रकार अगर सतसंग के द्वारा हमारे विचारों की और संस्कारों की शुद्धि नही होगी तो जन्म-मरण का रोग वो तैयारी है समझों। शुद्ध हवा नही आती तो रोग होंगे वहाँ पर। आप अपना कमरा बंद करके बैठ जाओं खिडकी भी बंद रखो, दरवाजा भी बंद रखो १५ मिनट आप बैठो, फिर आप बाहर जाओ, फिर अपने कमरे में आओ आपको अपना कमरा ही दुर्गन्धयुक्त लगेगा तो वहाँ शुद्ध हवा जरूरी है ऐसे ही हमारा जो मानसिक कुपोषण होता रहता हैं, रुग्ण मानसिकता वाले लोगों के संग के कारण तो रोज अपने घर पर शाम को जब फ्री हो जाये तो थोडा सतसंग चलाकर बैठे नही तो आजतक चैनल पर सुबह बहुत जल्दी आता है ५ बजकर ४० मिनट (भारतीयसमयानुसार) पर आता है सुबह-सुबह थोडा अपना समझ का खुराक ले लो फिर आई बी एन-७ चैनल पर आता है ६ बजकर १० मिनट पर आता है थोडा अपना समझ का खुराक ले लें बापू की वाणी सुन ले उस समय तो पूरा दिन बढिया जायेगा।
तो वाणी के १० दोष निम्न है

०१ कुबोल दोष - माने चुभने वाली वाणी बोलना, चुभने वाले शब्द बोलते रहना। ये वाणी का कुबोल दोष है, बेटे को, बेटी को, पति को, पत्नी को ऐसे बोल ना बोले जिससे उअनको तकलीफ हो, उनका दिल दुःखे। ऐसा कोई भी न बोले, तो बोले कि इसने गलती कर दी तो बोलना पडेगा न तो उसने गलती कर दी तो अब क्या करे हम यमदूत तो है नही, क्या अपने से कोई गलती नही होती, इसका मतलब ये नही कि गलत आदमी का पोषण करते रहना पर घर पर सभी का ख्याल करके और बेटा-बेटी भक्ति के मार्ग में चलते है अगर उनकी श्रद्धा है तो माता-पिता को चाहिये कि उनको सहयोग करें कि चलो हमारी उम्र हुई हम नही कर पाये इतनी साधना, बेटे-बेटी तुम करते हो तुमको धन्यवाद हैं शाबास तुम और अच्छी तरह से करों और अपनी उपासना बढाओं और अपने साधना बढाओ हमें खुशी होगी। ऐसा करके उसका पोषण कर दिया जाये तो कुबोल दोष वाणी का नही रहेगा।


०२ सहसात्कार दोष - माने अविचार पूर्वक बोलना, विचार कर न बोलना। अविचार पूर्वक ना बोले, विचारपूर्वक कर बोलें और जब हम नही बोल रहे है तो देखे कि मन क्या सोच रहा हैं। बडी साधना है ये, विचारपूर्वक नही बोलेगा आदमी तो उपहास का पात्र बनेगा। इसलिये "बिना विचारे जो करे सो पाछे पछतायें" खूब विचारपूर्वक।


०३ असद आरोपण दोष - असद आरोपण दोष माने क्या कि दूसरों को गलत मार्गदर्शन देते रहना। अरे नही-नही सतसंग की क्या जरुरत है। दीक्षा की क्या जरुरत हैं। दूसरों को गलत मार्गदर्शन देना दूसरों को गलत सूचनाये देना ऐसा हुआ, वैसा हुआ अरे तू सही बात बता न, तू सच्चाई से दूर क्यों रहता हैं। सत्य स्वरूप ईश्वर का तुझे डर नही है क्यो किसी को गलत मार्गदर्शन देना। असद वाणी का ये जो असद आरोपण दोष है इसमें ये भी आ जायेगा कि दूसरे का दोष नही है फिर भी उसपर वो दोष मड देना कि इसने ये किया इसने वो किया इसलिये ऐसा हो गया। असद आरोपण दोष हैं यें। लोग बहुत बेचारे सतसंग के अभाव में गुमराह बहुत होते है। बाहर की दुर्गन्ध से अपने को बचाते है लेकिन भीतर इन दोषों की दुर्गन्ध इसको सहते रहते हैं इसमें मजा आता हैं।


०४ निरपेक्ष दोष - निरपेक्ष दोष माना शास्त्र से विपरीत वाणी ही बोलते रहना। शास्त्रों की परवाह न करना। शास्त्रों में जो लोक-परलोक की बातें आती हैं उसकों अनदेखा करना या उसको झूठी मानना। हम नही मानते इन सब बातों को, हम नही मानते शास्त्र कों, हम तो ये बोलेंगे, ये निरपेक्ष दोष है।


०५ संक्षेप दोष - माने अपनी बात को ठीक से न कह पाना। यथार्थ रूप से न प्रस्तुत कर पाना। बाल संस्कार की जो सेवा करते है या ऋषि प्रसाद की जो सेवा करते है बाहर, बाल संस्कार जो चलाते है वो लोग थोडा मौन रखे। मौन रखने से आपके शब्दों में जान आयेगी। मौन रखने से वाणी जो बोली जायेगी वो कंठ से नही, हृदय से आयेगी। शब्द नही होंगे कोरे शब्दों के पीछे आपका हृदय काम करेगा। आपके प्राण लगेंगे। और आपके बालसंस्कार केन्द्र में बच्चों की संख्या और अधिक बढेगी। बच्चों को आनन्द आयेगा और आपके बालसंस्कार में आने वाले बच्चे और अधिक सफलता की ऊँचाई को छुवेंगे। मेरिट में आयेंगे। रोग मुक्त होंगे। बच्चे प्रभावशाली होंगे। बच्चों के माता-पिता भी खुश होंगे। उनका उत्साह बढेगा।


०६ क्लेश दोष - माने झगडे की भाषा बोलना। बात-बात में गरम हो जाना एकदम। लोग ऐसी ही भाषा बोलते है झगडे की, झगडा बडे ऐसी ही भाषा बोलते है। झगडा मिट जाये ऐसी भाषा बोलनी चाहिये। समाज में है तो कभी कुछ कभी कुछ होता रहता है झगडा बडे ऐसा वाक्य न बोला जाये। ऐसा वाक्य बोला जये कि झगडा मिट जाये। शान्ति के साम्राज्य की स्थापना हो जाये। कितना अच्छा होगा, आज जरुरत हैं हमारे देश में, पूरे विश्व मानव को जरुरत है। कि झगडे की भाषा न बोलें अपितु शान्ति बडे ऐसी भाषा बोले। मधुर व्यवहार नाम की पुस्तक हम लोग उसका जितना हो सके उसका प्रचार-प्रसार करे लोगों तक पहुचायें अधिक से अधिक घरों में ताकि घर-घर में शान्ति हों। घर-घर में लक्ष्मी का आगमन हो समृद्धि बढें। कौन साधु नही चाहेगा कि हमारा देश सम्पन्न हों।


०७ विकथा दोष - माने व्यर्थ बोल रहे हैं। मानों कि पानी में मथनी चला रहे है कि मक्खन निकलेगा। कई लोगों की आदत होती है व्यर्थ बहुत बोलते रहते हैं तो ये विकथा दोष हैं।


०८ हास्यास्पद दोष - माने किसी का उपहास करते हुए बोलना, किसी की मजाक उडाते हुए बोलना। अपने जीवन में किसी का उपहास क्यों करना, किसी की मजाक क्यों उडाना, किसी पर कटाक्ष क्यों करना, सावधानी।


०९ अशुद्ध दोष - माना बोलते हुऐ ठीक से न बोल पाना और व्याकरण की कई भूलें रह जाना।


१० द्वेष दोष - माने द्वेष और ईर्ष्या से प्रेरित होकर बोलते रहना ऐसा न हो। सबका भला हो। मधुर व्यवहार पुस्तक और बापूजी की वाणी का बारंबार श्रवण तो वाणी के ये १० दोष दूर होते जाते है सतसंगी साधकों के जीवन में से और साधकों के जीवन में तेजस्विता और ओजस्विता आती जाती है बढती जाती है। भले उनसे कोई दुर्व्यवहार करे पर साधक समता में रहते है भले कही भी रहते हो, दिल्ली में हो चाहे लुधियाना में, भारत में हो य विदेश में रहते हो आनन्द में रहते हैं

हरिः ॐ

स्रोत - उत्तरायण ध्यान योग शिविर २००९ (वीसीडी स्वामी सुरेशानन्द जी भाग ०८)यदि सुनना चहते है तो इस लिंक पे जाये

http://www.ashram.org/AshramPortalNew/Webcast/satsangwebcast.aspx?titleid=634

यदि लिखने में कुछ गलती हो गयी हो तो कृपया क्षमा चाहता हूँ।

रविवार, 11 जनवरी 2009

माघ मास की महिमा

माघ मास की महिमा

११ जनवरी से ९ फ़रवरी तक माघ मास है। सामान्य जल भी गंगा जल माना जाता है माघ मास में । प्रत्येक तिथी पर्व के रूप में माघ मास की मानी गयी है इन तिथीयों में स्नान, दान, जप, उपवास, भगवत् पूजा, संत दर्शन, अत्यन्त फलदायी माना जाता है। माघी पूर्णिमा, अगर किसी कारण एक महीना आप स्नान नही कर सकते भोर में तडके, तो एक सप्ताह ही कर लीजिये और एक सप्ताह नही कर सकते तो ३ दिन तो उस पर्व के निमित्त कर लिजीयें और ३ दिन भी नही कर सकते तो पूनम के दिन तो कर ही लेना। और इस माघ मास में २६ जनवरी आज १० है २६ जनवरी का दिन जो है उसका बडा महत्व हैं क्योकि २६ जनवरी को सोमवती अमावस्या है। जैसा सूर्य ग्रहण के समय जप तप दान करने का फल होता है वैसा ही फल सोमवती अमावस्या को होता हैं। ऐसा ही महाफल। महापुण्य रविवार की सप्तमी पड़ जाये तो वो महाफल होता हैं। मंगलवार की चतुर्थी तिथी आ जाये तो भी वही महाफल होता हैं और बुधवार की अष्टमी आ जाये तो इन पर्वों का इन तिथीयों का बडा प्रभाव पडता हैं।

स्रोत :- पूज्य सदगुरुदेव के अजमेरी गेट दिल्ली (१० जनवरी ०९) में आयोजित पूनम दर्शन सत्संग से

वर्ष २००९ में ये तिथीयाँ किस दिन आती है वो निम्न हैं -

०४ मार्च २००९ - बुधवार - अष्टमी
२८ अप्रेल २००९ - मंगलवार - चतुर्थी
२८ जून २००९ - रविवार - सप्तमी
१५ जुलाई २००९ - बुधवार - अष्टमी
२९ जुलाई २००९ - बुधवार - अष्टमी
०८ सितम्बर २००९ - मंगलवार - चतुर्थी
२२ सितम्बर २००९ - मंगलवार - चतुर्थी
२५ अक्टूबर २००९ - रविवार - सप्तमी
२५ नवम्बर २००९ - बुधवार - अष्टमी
०९ दिसम्बर २००९ - बुधवार - अष्टमी

यदि कोई गलती हो गयी हो तो गुरुदेव से क्षमा प्रार्थी हूँ ।

बुधवार, 31 दिसंबर 2008

व्यतिपात योग - स्वामी सुरेशानन्द जी

व्यतिपात योग

व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है।

वाराह पुराण में ये बात आती है व्यतिपात योग की।

व्यतिपात योग माने क्या कि देवताओं के गुरु बृहस्पति की धर्मपत्नी तारा पर चन्द्र देव की गलत नजर थी जिसके कारण सूर्य देव अप्रसन्न हुऐ नाराज हुऐ, उन्होनें चन्द्रदेव को समझाया पर चन्द्रदेव ने उनकी बात को अनसुना कर दिया तो सूर्य देव को दुःख हुआ कि मैने इनको सही बात बताई फिर भी ध्यान नही दिया और सूर्यदेव को अपने गुरुदेव की याद आई कि कैसा गुरुदेव के लिये आदर प्रेम श्रद्धा होना चाहिये पर इसको इतना नही थोडा भूल रहा है ये, सूर्यदेव को गुरुदेव की याद आई और आँखों से आँसु बहे वो समय व्यतिपात योग कहलाता है। और उस समय किया हुआ जप, सुमिरन, पाठ, प्रायाणाम, गुरुदर्शन की खूब महिमा बताई है वाराह पुराण में।

कथा स्रोत - बडोदा २००८ में १२ नवम्बर को सुबह के दीक्षा सत्र में (स्वामी सुरेशानन्द जी के सत्संग से)

व्यतिपात योग हर महिने में एक बार जरुर आता है वर्ष २००९ में किस तारीख को यह योग आयेगा और उसके अनुमानित समय (दुबई समयानुसार) की सूची निम्न है।

२ जनवरी २००९ को ००.०१ बजे से २२:३८ बजे तक
२७ जनवरी २००९ को ०३:१६ बजे से २८ जनवरी ०३:४३ बजे तक
२१ फ़रवरी २००९ को ०७:१७ बजे से २२ फ़रवरी ०८:०२ बजे तक
१८ मार्च २००९ को ११:५९ बजे से १९ मार्च १२:५० बजे तक
१२ अप्रेल २००९ को १९:३२ बजे से १३ अप्रेल १९:२२ बजे तक
८ मई २००९ को ०३:४१ बजे से ९ मई ०२:४४ बजे तक
२ जून २००९ को १२:२३ बजे से ३ जून ११:१५ बजे तक
२७ जून २००९ को २३:२२ बजे से २८ जून २०:४१ बजे तक
२३ जुलाई २००९ को १६:०८ बजे से २४ जुलाई १२:१७ बजे तक
१८ अगस्त २००९ को ११:१२ बजे से १९ अगस्त ०७:१९ बजे तक
१३ सितम्बर २००९ को ०२:०८ बजे से २३:२९ बजे तक
८ अक्टूबर २००९ को १२:२१ बजे से ९ अक्टूबर १०:०१ बजे तक
२ नवम्बर २००९ को २३:२९ बजे से ३ नवम्बर २१:१४ बजे तक
२८ नवम्बर २००९ को ११:३७ बजे से २९ नवम्बर ०९:५९ बजे तक
२३ दिसम्बर २००९ को १८:५२ बजे से २४ दिसम्बर १९:२० बजे तक

तारिख या समय में किसी प्रकार की त्रुटी हो गई हो तो कृपया उसे ठीक करने की कृपा करे।